अलीगढ़ | मैक्सफोर्ट अस्पताल का लाइसेंस निलंबित, 24 घंटे में मरीजों को शिफ्ट करने के निर्देश

अलीगढ़ : रामघाट रोड स्थित मैक्सफोर्ट अस्पताल के संचालक इलाज के नाम पर मरीजों से अधिक वसूली करने के मामले में बुरी तरह फंस गए है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। 24 घंटे में अस्पताल से सभी मरीजों को दूसरी जगह शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को 24 घंटे पूरे हो जाएंगे। कोविड के इलाज की अनुमति निरस्त होने के बाद भी मरीजों को भर्ती के आरोप में अलग से नोटिस दिया गया है। तीन दिन में प्रबंधन को जवाब देना है। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी। अग्रिम आदेशों तक अस्पताल सील रहेगा।

मैक्सफोर्ट अस्पताल में भर्ती 72 वर्षीय सीमा देवी के स्वजन ने शुक्रवार को डीएम से शिकायत कर अस्पताल प्रबंधन पर शासन से तय मानकों से अधिक वसूली करने के आरोप लगाए थे। कोरोना नियमों का पालन न करने की भी बात कही थी। डीएम ने एसीएम द्वितीय अंजुम बी के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम को अस्पताल भेजा। टीम ने जांच की। मरीजों का रिकार्ड देखा। जांच में पता चला कि मरीज से 50 हजार रोज के हिसाब से वसूली हो रही थी, जबकि अधिकतम गंभीर मरीज से 14 हजार रुपये के हिसाब से फीस ली जा सकती है। एसीएम ने तत्काल अपने सामने ही अस्पताल की ओपीडी सील करा दी। अन्य परिसर को भी सील करा दिया। केवल भर्ती मरीज वाले वार्ड को छोड़ दिया। एसीएमओ महेंद्र माथुर ने बताया कि रविवार को अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी कर 24 घंटे के अंदर सभी मरीजों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पूरे अस्पताल को सील किया जा सके। अस्पताल का लाइसेंस भी निलंबित कर दिया गया है। अब प्रबंधन अपना पक्ष रखेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह भी पता चला था कि अस्पताल की छह मई को ही कोविड मरीजों का इलाज करने की अनुमति निरस्त हो चुकी है, इसके बाद भी भर्ती किए जा रहे थे। अस्पताल प्रबंधन को इसके लिए अलग से नोटिस दिया गया है।

एसजेडी अस्पताल पर चुप्पी

जनता से मानकों से अधिक वसूली करने के मामले में एक ओर प्रशासन मैक्सफोर्ट जैसे अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई कर सराहनीय काम कर रहा है। दूसरी ओर एसजेडी अस्पताल पर अब तक चुप्पी साधने से सवाल उठ रहे हैं। पांच मौतों का मामला तो यहां का भी गंभीर है, लेकिन अब तक केवल नोटिसों तक ही बात सिमटी हुई है। यहां पर स्वजनों ने चीख-चीखकर आक्सीजन की कमी व अस्पताल प्रबंधन की कमी के आरोप लगाए थे, अब भी यहां मामला ठंडे बस्ते में पड़ा है।

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