एक ही व्यक्ति कभी सफाई कर्मचारी, कभी मजदूर तो कभी नल मिस्त्री! नल मरम्मत के नाम पर भी लाखों खर्च का आरोप—शिकायत के बाद जांच के घेरे में पंचायत का हिसाब-किताब
अलीगढ़। ग्राम पंचायत अलहदादपुर नीवरी में विकास की गाड़ी
कागजों पर तो खूब दौड़ती नजर आ रही है, लेकिन जमीन पर
उसकी रफ्तार देखने के लिए शायद चश्मे की जरूरत पड़ जाए! पंचायत निधि से पांच
वित्तीय वर्षों में हुए करोड़ों रुपये के वाउचर और भुगतान को लेकर ग्रामीणों ने
गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मामला अब इतना गंभीर हो चुका है कि जिलाधिकारी अलीगढ़
द्वारा जांच टीम गठित कर दी गई है।
शिकायत के मुताबिक वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक करीब ₹1.75 करोड़
के वाउचर प्रस्तुत हुए और लगभग ₹1.37 करोड़ का भुगतान पास हुआ।
जिसपर समाजसेवी इरफान खान ने कहा कि इतना पैसा विकास के नाम
पर निकला तो विकास आखिर गया कहां? इरफान खान का
दावा है कि आज भी थोड़ी बारिश होते ही रास्ते जलभराव में तब्दील हो जाते हैं और
पोखरों से लेकर जल निकासी व्यवस्था तक सवालों के घेरे में है।
कभी सफाई कर्मचारी, कभी मजदूर... एक ही आदमी में पूरी पंचायत
का हुनर!
मामले का सबसे दिलचस्प आरोप शमीम अहमद से जुड़ा है। शिकायत
के अनुसार एक ही व्यक्ति को अलग-अलग समय पर सफाई कर्मचारी, नाला सफाई कर्मचारी, इंटरलॉक
सड़क का मजदूर, परदे फिटिंग करने वाला, पानी फिटिंग वाला, मिट्टी भराव करने वाला, नल मिस्त्री, टाइल्स लगाने वाला और यहां तक कि ट्रैक्टर
से पानी निकालने वाला तक दर्शाया गया।
करीब 20-25 वाउचरों
में लगभग ₹3.13 लाख के भुगतान का उल्लेख शिकायत में है।
अब अगर ये आरोप जांच में सही साबित होते हैं तो सवाल तो
बनता है—एक आदमी है या पंचायत का ‘ऑल इन वन सर्विस सेंटर’?
हालांकि जरूरी बात—यह केवल शिकायत
में लगाए गए आरोप हैं। जांच टीम ही बताएगी कि वास्तव में कौन सा काम किसने किया और
भुगतान किस आधार पर हुआ।
नल ऐसे सुधरे कि हिसाब देखकर
माथा खराब हो जाए!
शिकायत में नलों के रिबोर पर ₹2.54 लाख और नल मरम्मत पर ₹8.68 लाख खर्च होने का भी उल्लेख है।
यदि रिकॉर्ड में लाखों रुपये नल मरम्मत और रिबोर पर खर्च
हुए हैं तो मौके पर यह देखना बेहद जरूरी होगा कि कितने नल वास्तव में ठीक हुए, कितने का रिबोर हुआ और आज कितने चालू हालत
में हैं।
रिश्तेदारों और परिचितों को
भुगतान का आरोप भी जांच के पन्ने पर
शिकायत में प्रधानपति के कथित रिश्तेदारों, परिचितों और परिवार की महिलाओं को भी
विभिन्न कार्यों के नाम पर भुगतान किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।
लेकिन यहां भी फैसला खबर नहीं, जांच करेगी।
क्या उन्होंने काम किया था?
क्या मस्टर रोल में नाम था?
क्या बैंक खाते में भुगतान गया?
क्या मौके पर काम हुआ?
इन सवालों का जवाब अब जांच टीम के रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन
से मिलना है।
अब फाइलों से निकलकर जमीन पर
पहुंचेगी जांच
शिकायतकर्ताओं ने भारी मात्रा में शपथपत्र देकर मांग की है
कि केवल कार्यालय में बैठकर कागजों की जांच न हो, बल्कि मौके पर जाकर सड़क, नाली, पोखर, जल निकासी, नल रिबोर,
नल मरम्मत, सफाई और अन्य विकास कार्यों का जमीनी
स्तर पर सत्यापन कराया जाए।
और यही इस पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी है।
अब देखना यह है कि ‘विकास’ कागजों में
भारी है या जमीन पर!
फिलहाल ग्राम प्रधान रुबीना पर लगाए गए आरोपों को सिद्ध
तथ्य नहीं माना जा सकता। मामला जांच के अधीन है और जिलाधिकारी अलीगढ़ द्वारा जांच
टीम गठित किए जाने के बाद अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है।



.jpeg)
.jpeg)