हरदुआगंज : रात में बकरा चुराते देखा था…” कहकर सुबह कर दी ‘ओपन लूट’! बुढासी में पड़ोसी के घर घुसकर भैंस-बकरे ले गए दबंग, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल



चोरी के आरोप की तहरीर का हवाला देकर जबरन भैंस व बकरा खोलने को जायज ठहराते हुए दबंगो के समर्थन में दिखी पुलिस

जनपद अलीगढ़ के बुढासी कस्बे में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां बकरा चोरी का आरोप लगाकर पड़ोसी दबंग परिवार कथित तौर पर महिला के घर में घुस गया और उसकी एक लाख रुपये कीमत की भैंस व दो बकरे जबरन खोलकर ले गया। हैरानी की बात यह रही कि पूरा घटनाक्रम चर्चा में आने के बाद भी पुलिस शुरुआत में कार्रवाई की जगह “दूसरे पक्ष की तहरीर” का हवाला देती नजर आई। अब इस मामले का वीडियो भी सामने आया है।

पीड़िता हुमा पुत्री वहीद खाँ निवासी बुढासी के अनुसार शुक्रवार सुबह पड़ोसी यामीन अपने चार बेटों के साथ उनके घेर में पहुंचे और आरोप लगाने लगे कि रात में उनका बकरा चोरी हुआ है, जिसे उन्होंने छत के रास्ते ले जाते देखा। परिवार ने कहा कि यदि ऐसा है तो रात में शोर क्यों नहीं मचाया गया और गली में लगे कैमरे क्यों नहीं चेक कराए गए? आरोप है कि इसी बात पर दबंग भड़क गए और धमकी देते हुए भैंस व दो बकरे जबरन खोलकर ले गए।

पीड़िता पक्ष का यह भी आरोप है कि जब वृद्ध महिला चमन ने पशु ले जाने से रोकने की कोशिश की तो उनके साथ मारपीट की गई। पूरे घटनाक्रम के बाद इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है। लोगों का कहना है कि अगर किसी पर चोरी का शक था तो पुलिस बुलाकर कानूनी कार्रवाई की जाती, लेकिन यहां तो “शक” के नाम पर खुद ही फैसला सुनाया गया और खुद ही “रिकवरी” भी कर ली गई।

मामले में चौकी इंचार्ज बुढासी अजहर हसन का कहना है कि यामीन पक्ष से बकरा चोरी की नामजद तहरीर मिली है। दूसरे पक्ष की भैंस और बकरे खोलकर ले जाने के मामले की जांच बाद में की जाएगी। यही बयान अब सवालों के घेरे में है। इलाके में चर्चा है कि क्या केवल तहरीर दे देने भर से किसी को दूसरे के घर में घुसकर पशु खोल ले जाने का लाइसेंस मिल जाता है? देखें विडियो,,,,

कानून क्या कहता है?

अधिवक्ता नम्रता शर्मा के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को डराकर, धमकाकर या उसके सामने से जबरन उसकी संपत्ति ले जाई जाती है तो मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 309 के तहत लूट की श्रेणी में आ सकता है।

बिना अनुमति किसी के घर या घेर में घुसना धारा 331 के अंतर्गत अपराध माना जाता है।

वहीं धमकी देने या भय पैदा करने की स्थिति में धारा 351 भी लागू हो सकती है।

लेकिन बुढासी का यह मामला अब लोगों को यही कहने पर मजबूर कर रहा है कि थाने की टेबल के नीचे से “सेटिंग” हो जाए तो ऊपर रखी कानून की किताब अक्सर सिर्फ सजावट बनकर रह जाती है। सवाल यह है कि आखिर कानून अपने हाथ में लेने वालों पर कार्रवाई होगी या फिर “तहरीर बनाम तहरीर” के खेल में मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?