अलीगढ़ | मुखाग्नि तो दी, मगर भाई को मृत साबित नहीं कर सका, जानिए क्‍या है मामला

अलीगढ़ | मुखाग्नि तो दी, मगर भाई को मृत साबित नहीं कर सका, जानिए क्‍या है मामला
डेस्क समाचार दर्पण लाइव अलीगढ़ :  राजेंद्र उर्फ कलुआ का शव ऐसा नहीं था कि उसका अंतिम संस्कार विधि विधान से किया जा सके। फिर भी उसके बड़े भाई सौरन ने अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी। अविवाहित होने के चलते शव पर हल्दी लगाई। जो भी रस्म पूरी हो सकती थी सब की। भाई को अंतिम विदाई की ये रस्म घर पर नहीं, बल्कि शमशान गृह में की गई। शायद ही ऐसा कोई शव रहा हो जिसका शुद्धिकरण शमशान गृह में हुआ हो। राजेंद्र ऐसा ही अभागा था। उसका भाई सोरन भी बदनसीब निकला। भाई का अंतिम संस्कार तो कर दिया, लेकिन ये साबित नहीं कर पाया कि शव उसके भाई का ही था। हत्यारोपी राकेश के पिता बनवारी ने उस पर इतना दबाव बना दिया था कि वो कुछ नहीं कर पाया। अंतिम संस्कार भले ही राजेंद्र के शव का हुआ हो लेकिन कागजों में राकेश मरा। बनवारी भी यही चाहता था, इस लिए उसने सोरन को अंतिम संस्कार करने से रोका नहीं। वो चाहता था कि जल्दी से जल्दी चिता जले। खुद भी शमशान गृह में मौजूद रहा। गांव के हर व्यक्ति ने ये नजारा देखा था, लेकिन कोई कुछ नहीं कर पाया। यह है मामला गंगीरी के नौगवां निवासी राजेंद्र की मर्डर मिस्ट्री किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। प…