अलीगढ : हरदुआगंज के कलाई में मनरेगा का खेल पकड़ा: एक काम कई बार दिखाकर 8 लाख डकारे, प्रधान के अधिकार सीज

 


हरदुआगंज के कलाई गांव की प्रधान ने साबित कर दिया कि अगर “इच्छाशक्ति” मजबूत हो तो मनरेगा भी स्टार्टअप बन सकती है—बस फर्क इतना कि यहां निवेश सरकार का और मुनाफा “कुछ खास लोगों” का।

जिला मजिस्ट्रेट ने ग्राम प्रधान इंदु देवी के वित्तीय अधिकार सीज कर दिए हैं। मतलब साफ है—अब खजाने की चाबी उनसे लेकर सिस्टम ने कहा है, “बहन जी, आप बस नाम की प्रधान रहिए, हिसाब हम देख लेंगे।”

घोटाला कैसे हुआ – 

एक ही घर में दो-दो जॉब कार्ड बना दिए

→ मतलब एक आदमी, मजदूरी दो की

एक ही काम को अलग-अलग नाम से दिखाया

→ वही नाली, वही सड़क… बस नाम बदल गया और पैसा फिर निकल गया

कुल मिलाकर करीब 8 लाख रुपये का खेल

गांव वाले बोल रहे हैं—

“यहां फावड़ा नहीं चला, दिमाग खूब चला है।”

घोटाले का गणित: एक घर, दो जॉब कार्ड—और पैसा डबल!

जांच में जो तस्वीर सामने आई, वो किसी कॉमेडी स्क्रिप्ट से कम नहीं। आरोप है कि एक ही घर में दो जॉब कार्ड बनवाए गए, ताकि मजदूरी भी डबल दिखे और भुगतान भी। इतना ही नहीं, एक ही काम को अलग-अलग नाम देकर पैसा निकालने का भी खेल चला। कुल मिलाकर 8,05,498 रुपये की “रचनात्मक लेखा-जोखा” सामने आया।

जिला मजिस्ट्रेट ने ग्राम प्रधान इंदु देवी पर लगे आरोपों को सही मानते हुए उनके वित्तीय अधिकारों पर तत्काल ब्रेक लगा दिया है। यानी अब “खाता-खजाना” उनके हाथ से निकल चुका है। साथ ही, गांव की गाड़ी चलाने के लिए तीन सदस्यों की एक कमेटी बना दी गई है, जो अब वित्तीय और प्रशासनिक फैसले करेगी—मतलब, अब गांव में “टीमवर्क” से खर्च होगा, अकेले की कलाकारी नहीं चलेगी।

ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, अलीगढ़ के अधिशासी अभियंता को जांच अधिकारी बनाया गया है। उन्हें एक महीने में पूरी रिपोर्ट देनी है—वो भी सबूत, फोटो और तकनीकी जांच के साथ। यानी अब फाइलों के साथ-साथ जमीन पर भी सच्चाई नापी जाएगी।






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