लखनऊ पीजीआई में डॉक्टरों के आगे गिड़गिड़ाते रहे BJP के पूर्व सांसद, बेटे की तड़पकर हो गई मौत

उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में हो रही लापरवाही से जुड़े अनेकों मामले अक्सर सामने आते हैं और स्वास्थ्य सेवाओं में हो रही ऐसी ही लापरवाही के बीच अक्सर लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ती है.

तेजी से सामने आ रहे ऐसे मामलों के बावजूद प्रदेश सरकार की ओर से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं. अब यूपी की राजधानी लखनऊ से स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा ऐसा मामला सामने आया, जिसने सरकार के बड़े बड़े दावों की पोल खोल दी.

मिली जानकारी के अनुसार, यूपी की राजनीति में अहम किरदार निभाने वाले भाजपा नेता व पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्रा के बेटे की रविवार देर रात लखनऊ के प्रतिष्ठित अस्पताल पीजीआई में मौत हो गई है. बेटे की मौत के बाद पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्रा ने कहा कि इस अस्पताल में उनके बेटे प्रकाश मिश्रा को इलाज तो दूर की बात है, भर्ती करने के लिए बेड तक नहीं दिया गया.

बेड खाली न होने की बात कहकर बरती गई लापरवाही

आपको बताते चलें कि पूर्व सांसद के बेटे को किडनी की बीमारी थी. बेटे की मौत के बाद पूर्व सांसद ने पीजीआई अस्पताल के प्रबंधन पर इलाज के मामले में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन की ओर से इमरजेंसी में बेड खाली न होने की बात कही गई और इसी बात के चलते उनके बीमार बेटे को इलाज के लिए भर्ती नहीं किया गया.

डॉक्टरों के सामने गिड़गिड़ाते रहे पूर्व सांसद

मिली जानकारी के अनुसार, भाजपा नेता व पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्रा के बेटे प्रकाश मिश्रा लंबे समय से किडनी की बीमारी से ग्रसित थे, जिसके बाद रविवार को उनकी हालत अचानक खराब हो गई. बेटे की बिगड़ती हालत को देखते हुए पूर्व सांसद अपने बेटे को लेकर लखनऊ के पीजीआई अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने डॉक्टरों से तुरंत बेटे को भर्ती कर उसका इलाज शुरू करने की गुजारिश की. इतना ही नहीं, प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि वे अपने बेटे को स्ट्रेचर पर लिटाकर आसपास मौजूद डॉक्टरों के आगे अपने बेटे को भर्ती करने के लिए गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन डेढ़ घंटे तक लंबे प्रयास के बाद भी वे अपने बेटे को अस्पताल में भर्ती नहीं करा सके.

धरने पर बैठे पूर्व सांसद, जांच टीम हुई गठित

मिली जानकारी के अनुसार, पूर्व सांसद से पीजीआई के डॉक्टरों ने साफ तौर पर बेड खाली न होने की कह दी थी, इसलिए उनके बेटे को भर्ती नहीं किया गया. इस बात को लेकर पूर्व सांसद और डॉक्टरों के बीच हो रही कहासुनी के दौरान उनके बेटे ने दम तोड़ दिया. बेटे की मौत के बाद पूर्व सांसद अस्पताल प्रबंधन और वहां तैनात डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ही धरने पर बैठते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया. देखते ही देखते अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया. बढ़ते हंगामे को देखते हुए पीजीआई के डायरेक्टर आरके धीमान मौके पर पहुंचे और मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच के आदेश दिए. डायरेक्टर आरके धीमान ने बताया कि इस मामले की जांच के लिए टीम गठित की गई है. तीन सदस्यीय टीम मामले में जांच कर आज रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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