भईया मुझे बचा लो, भाई एंबुलेंस लेकर गया तो अस्पताल से जवाब मिला वो तो मर गया

भईया मुझे बचा लो, भाई एंबुलेंस लेकर गया तो अस्पताल से जवाब मिला वो तो मर गया
भईया मुझे बचा लीजिए। मेरी तबीयत ठीक नहीं है। इस पर मरीज के भाई ने डाक्टर से बेहतर इलाज की बात कही तो जवाब मिला कि आपको हम पर विश्वास नहीं हैं तो किसी दूसरे अस्पताल में ले जा सकते हो।  डेस्क समाचार दर्पण लाइव   अलीगढ: भाई की जिंदगी बचाने के लिए असहाय भाई ने नोएडा के किसी अस्पताल में भर्ती कराने की व्यवस्था भी कर ली। शाम को जब एंबुलेंस लेकर वह अस्पताल पहुंचा तो जवाब मिला की आपके भाई की तो मौत हो गई। ये पीड़ा सासनी गेट क्षेत्र के एक भाई की है। जिसके भाई का शहर के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। दिन में दोपहर साढ़े तीन बजे के करीब उसकी अस्पताल में भर्ती अपने भाई से फोन पर बात हुई थी।  शाम को उसकी जान चली गई। इलाज् के लिए डेढ़ लाख रुपये भी जमा कर दिए थे। इसके बाद भी भाई को बचा नहीं पाया।   मानिटरिंग करने वाला कोई नहीं  ये पीड़ा किसी एक मरीज की नहीं है। जिससे आप बात करोेगे रोना ही रोएगा। लेकिन क्या करे ? कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के परिजनों को इतना तोड़ दिया है कि वह अपनी पीड़ा बयां तक नहीं कर पाते। निजी अस्पतालों में इलाज की क्या व्यवस्था है? ये भी देखने वाला कोई नहीं है? मरीजों से इल…