अब नहीं रुकेगा संकल्प – 11 जुलाई को कलेक्ट्रेट पर जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग को लेकर होगा एकदिवसीय महाधरना

अलीगढ़।
देश की तेजी से बढ़ती जनसंख्या अब केवल आर्थिक और सामाजिक संकट नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक संरचना और सनातन अस्तित्व पर गहराता खतरा बन चुकी है। वर्षों से उपेक्षित इस मुद्दे पर अब हिंदू समाज पूरी मजबूती से मुखर हो रहा है।

जनसंख्या समाधान फाउंडेशन एवं हिंदू फ्रंट के संयुक्त आह्वान पर 11 जुलाई को देश के हर जिले में कलेक्ट्रेट पर एकदिवसीय धरना एवं राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम घोषित किया गया है। इसी के तहत अलीगढ़ में भी व्यापक तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं।

इस राष्ट्रहित अभियान को गति देने के लिए फाउंडेशन की राष्ट्रीय सचिव एवं उत्तर प्रदेश की मीडिया प्रभारी गौरी पाठक के निज निवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें संगठन के विभिन्न पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता विशेष रूप से उपस्थित रहे।


जनसंख्या नियंत्रण सिर्फ कानून नहीं, अब राष्ट्र रक्षा का सवाल

बैठक में वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि –

  • “आज भी देश के कई हिस्सों में कुछ समुदायों द्वारा आठ-आठ, दस-दस बच्चों की खुली छूट लेकर जनसंख्या विस्फोट को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि हिन्दू समाज पर ‘हम दो, हमारे दो’ का अनावश्यक नैतिक बोझ डाला गया है।”
  • “इस असंतुलन का परिणाम देश को जातीय संघर्ष, संसाधनों की लूट और आने वाले वर्षों में गृह अशांति के रूप में भुगतना पड़ेगा। इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, जनसंख्या नियंत्रण कानून तत्काल लाया जाना चाहिए।”

गौरी पाठक ने कहा – अब समय चुप बैठने का नहीं, सड़क पर उतरने का है

गौरी पाठक ने सभी मातृशक्तियों और राष्ट्रभक्त नागरिकों से आह्वान करते हुए कहा –

“यह लड़ाई किसी एक संगठन की नहीं, बल्कि हर उस सनातनी भाई-बहन की है जो भारत को हिन्दू राष्ट्र के स्वरूप में सुरक्षित देखना चाहता है। अब समय आ गया है कि हम सिर्फ सोशल मीडिया पर नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर व्यवस्था को जगाएं।”

उन्होंने कहा कि यह धरना सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, भारत के भविष्य को दिशा देने वाला संकल्प है। देश को जनसंख्या नियंत्रण कानून की सख्त जरूरत है, और इसके लिए हर जनपद के कलेक्ट्रेट पर हजारों की संख्या में जुटकर दबाव बनाना होगा।


बैठक में रहा मातृशक्ति का उत्साह, दर्जनों महिला कार्यकर्ता रहीं मौजूद

इस रणनीतिक बैठक में प्रमोद सेल, अंजू सक्सेना, कल्पना, हिमानी, शिखा, मोनिका समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
सभी ने अपने-अपने क्षेत्रों में इस कार्यक्रम की तैयारी की रूपरेखा बताई और अधिक से अधिक लोगों को धरने में शामिल कराने का संकल्प लिया।


देश के लिए समय निकालें – यही असली राष्ट्रसेवा है

बैठक के अंत में एक ही नारा गूंजा –
🟨 “जनसंख्या नियंत्रण कानून लाओ – भारत बचाओ!”
🟥 “हम दो, हमारे दो – इनके भी गिन लो!”

संगठन की ओर से सभी लोगों से 11 जुलाई को कलेक्ट्रेट पर समय से पहुंचने और धरने को सफल बनाने की अपील की गई। यह कार्यक्रम न किसी पार्टी से जुड़ा है, न किसी प्रचार की लालसा से – यह एक जनआंदोलन है, जो आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा और संस्कृति की रक्षा के लिए जरूरी है।


गौरी पाठक ने चेताया – "10-10 बच्चा पैदा करने वाली प्रवृत्ति खतरनाक, जनसंख्या असंतुलन भारत और सनातन के लिए सीधा खतरा"

बैठक को संबोधित करते हुए गौरी पाठक ने दो टूक शब्दों में कहा –

🗣️ "आज देश के भीतर कुछ वर्ग ऐसे हैं जो योजना बनाकर 10-10 बच्चे पैदा कर रहे हैं, और यह सिर्फ जनसंख्या बढ़ाने का नहीं, बल्कि जनसंख्या के जरिए सत्ता, संस्कृति और जमीन पर कब्जे की साजिश है।"

उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति केवल आर्थिक संसाधनों पर बोझ नहीं डालती, बल्कि जनसंख्या का असंतुलन खड़ा करके भारत के सामाजिक ढांचे और सनातन मूल्यों को सीधा खतरे में डाल रही है।

🔥 "अगर अब भी हिंदू समाज नहीं जागा, तो आने वाले 20 वर्षों में न हिन्दू बचेगा, न हिंदुस्तान का स्वरूप। ये लड़ाई किसी पार्टी की नहीं, बल्कि हर उस भारतीय की है जो भारत माता को असली रूप में देखना चाहता है।" – गौरी पाठक

उन्होंने सभी बहनों, भाइयों और युवाओं से अपील की कि

  • अब समय सिर्फ चिंता करने का नहीं
  • बल्कि सड़कों पर उतरकर आवाज़ उठाने का है
  • और जनसंख्या नियंत्रण कानून की माँग को राष्ट्रव्यापी आंदोलन बनाना है।
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