सावधान! अगर आपको किसी पुलिसकर्मी, चौकी इंचार्ज या अफसर के नाम से कॉल आए और वह OTP माँगे, तो आप बड़ा शिकार बन सकते हैं। क्योंकि जनसुनवाई पोर्टल पर अलीगढ़ पुलिस का जो नया खेल सामने आया है, उसने न सिर्फ जनता का विश्वास तोड़ा है बल्कि साइबर अपराधियों के लिए भी दरवाज़ा खोल दिया है।
जनसुनवाई का नया खेल
शिकायत दर्ज कीजिए और फिर इंतज़ार करिए। कुछ दिन बाद आपको एक कॉल आएगा। कॉल करने वाला कभी खुद को चौकी इंचार्ज बताएगा, कभी सीओ ऑफिस का कर्मचारी। और फिर वह OTP माँग लेगा। जैसे ही आपने नंबर बताया, उसी पल आपकी शिकायत पर “संतुष्ट” का ठप्पा लग जाएगा।
मतलब – जनता चाहे रोए या बिलखती रहे, सिस्टम पोर्टल पर दिखा देगा कि फरियादी तो बड़ा खुश है। यह सब हुआ सिर्फ इसलिए कि अफसरों की रैंकिंग चमकती रहे।
हरदुआगंज का केस
“मैंने शिकायत दर्ज की थी। कुछ दिन बाद एक कॉल आया। उसने खुद को चौकी इंचार्ज बताया और OTP माँगा। मैंने दे दिया। अगले दिन देखा तो शिकायत पर आख्या भी लग गई और मेरी तरफ से ‘संतुष्ट’ का फीडबैक भी चिपका दिया गया था।”
यहाँ मामला साफ है — फरियादी की जुबान बंद, पुलिस की रैंकिंग ऊँची।
सीओ ऑफिस की करतूत
“मेरी शिकायत एक महीने से लंबित थी। फिर एक कॉल आया। कॉल करने वाला बोला कि वह सीओ अतरौली ऑफिस से तरुण है। उसने निस्तारण के लिए OTP माँगा। मैंने दे दिया। अगले दिन देखा तो शिकायत पर संतुष्ट का फीडबैक दर्ज था। ये अधिकार मेरा था, लेकिन पुलिस ने धोखे से छीन लिया।”
यानी सिस्टम का “संतोष” अब OTP से खरीदा जा रहा है।
पुलिस-साइबर अपराध की मिलीभगत?
असली खतरा यही है कि पुलिस का यह तरीका सीधे-सीधे साइबर अपराधियों के लिए खुला मैदान बना रहा है। अगर कल को कोई अपराधी खुद को पुलिस बताकर OTP मांग ले तो? फरियादी सोचेगा कि शिकायत निस्तारित हो रही है और बैंक अकाउंट तक खाली कर बैठेगा।
यानि जनसुनवाई अब सिर्फ शिकायत नहीं, बल्कि जनता को साइबर ठगी में धकेलने का नया रास्ता बन चुका है।
जनता के लिए खतरे की घंटी 🔔
- जनता बोलेगी → पुलिस OTP लेकर जबरन चुप करा देगी।
- शिकायत दर्ज होगी → सिस्टम उसे संतुष्ट दिखा देगा।
- फरियादी ठगा जाएगा → पोर्टल पर रिपोर्ट चमक उठेगी।
सरकार ने OTP को सुरक्षा कवच बनाया था, लेकिन अलीगढ़ पुलिस ने उसे फर्जी प्रमाणपत्र में बदल डाला। और यही तरीका अब अपराधियों को जनता की जेब तक पहुँचाने का औजार बन सकता है।
यही है अलीगढ़ की हकीकत — जनता ठगी, पुलिस रैंकिंग में मस्त और साइबर अपराधियों के लिए दरवाज़ा पूरी तरह खोल दिया गया।