अलीगढ़ के हरदुआगंज थाने में इन दिनों कानून के दर पर इंसाफ गुम हो रहा है। एक पीड़ित की मेहनत जरूर 'कागजों की फाइलों' में टायर घिस रही है। मामला तालानगरी के अवधेश यादव का है, जिनकी TVS Radeon (UP81DJ6455) पिछले महीने चोरी हुई थी।
जासूस बन खुद बरामद की बाइक
आमतौर पर पुलिस का काम मुजरिम पकड़ना और सामान बरामद करना होता है, लेकिन तालानगरी के अवधेश के लिए ये बात बेमानी साबित हो रही है। एक फरवरी तालानगरी निकट रॉयल होम्स स्थित घर से चोरी हुई बाइक चोरी हुई थी। अवधेश ने 9 मार्च को अवधेश ने पुलिस का बोझ हल्का कर दिया। उन्होंने न सिर्फ अपनी बाइक ढूंढी, बल्कि तीन संदिग्धों से लोहा लेकर उसे अपराधियों के चंगुल से आज़ाद भी कराया। अब कायदे से तो उन्हें 'नागरिक सम्मान' मिलना चाहिए था, लेकिन सिस्टम ने उन्हें 'थाने के चक्कर' का इनाम दे दिया है।
"चोरों से छूटी, थाने में अटकी"
9 मार्च को जब अवधेश अपनी बरामद की हुई बाइक लेकर थाने पहुंचे थे, तो उन्हें लगा होगा कि अब इंसाफ की सवारी घर जाएगी। पुलिस ने बड़े प्यार से तहरीर लेकर रिसिविंग टोकन नंबर 594 थमाया और बाइक को अपने 'संरक्षण' में ले लिया। जिसके बाद बाइक थाने से अदृश्य' हो गई।
गजब विडंबना है! जिस बाइक को मालिक ने तीन बदमाशों के बीच से छीन लिया, उसे वो पिछले 20 दिनों से पुलिस के 'जांच' वाले चक्रव्यूह से नहीं निकाल पा रहे हैं। चोरों ने तो सिर्फ नंबर प्लेट हटाई थी, लेकिन लगता है पुलिस ने उस पर 'तारीख पर तारीख' की अदृश्य प्लेट लगा दी है।
अवधेश यादव रोज उम्मीद लेकर थाने जाते हैं, लेकिन वहां उन्हें "जांच चल रही है" का वो पुराना रिकॉर्ड सुना दिया जाता है
नतीजा ये है कि:
1. भागे चोरों के नाम भी बताए।
2. पुलिस: जांच के नाम पर बाइक 'दबाकर' बैठी है ।
3. मालिक: अपनी ही चीज के लिए मुजरिमों की तरह चक्कर काट रहा है ।
हरदुआगंज पुलिस का ये इंसाफ! जहाँ अपराधी को पकड़ना मुश्किल है, लेकिन बरामद माल को मालिक तक पहुँचाना उससे भी बड़ा 'हिमालय फतह' करने जैसा काम है।
